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Webserver Date: 16-January-2019

केजीएस-1 ने 941 दिन तक सतत प्रचालन करके विश्व रिकार्ड तोड़ा

 
 

केजीएस-1 ने 941 दिन तक सतत प्रचालन करके विश्व रिकार्ड तोड़ा

कैगा उत्पादन इकाई, उत्तर कन्नड, कर्नाटक

 

केजीएस की यूनिट-1 ने बिना रूके 941 दिनों तक नाभिकीय विद्युत रिएक्टरों का सतत प्रचालन करके 10 दिसंबर, 2018 को 0920 बजे विश्व रिकार्ड बनाया जिसने भारत को सभी प्रकार के नाभिकीय विद्युत रिएक्टरों के सतत प्रचालन करने में अंग्रेजी पंक्ति में लाकर खड़ा किया। रिकार्ड बनाने के दौरान केजीएस संयंत्र की यूनिट-1 99.4% की क्षमता गुणक से प्रचालित हुआ।

 

कैगा उत्पादन स्टेशन में 4 यूनिटें है जो 880 मेगावाट विद्युत का उत्पादन कर रही हैं। पहले और दूसरे रिएक्टर ने वर्ष 2000 में और तीसरे तथा चौथे रिएक्टर ने क्रमश: 2007 और 2011 में वाणिज्यिक प्रचालन प्रारंभ किया। केजीएस की सभी इकाईयाँ परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन न्यूक्लियर पॉवर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) द्वारा प्रचालित की जाती हैं।

 

वर्तमान में, भारत में 22 नाभिकीय विद्युत रिएक्टर हैं जिनकी स्थापित क्षमता 6780 मेगावाट है।

 

भारत के स्वदेशी नाभिकीय विद्युत कार्यक्रम को गति देने और देश के नाभिकीय उद्योग को आगे ले जाने वाले ऐतिहासिक निर्णय में परमाणु ऊर्जा के प्रभारी मंत्री और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अध्यक्षता की गई संघ मंत्रिमंडल ने फ्लीट मोड में 700 मेगावाट के पीएचडब्ल्यूआर की 10 इकाईयों के निर्माण के लिए अपना अनुमोदन प्रदान किया है।

 

21 रिएक्टर निर्माण की अलग-अलग अवस्था में हैं। इसमें कुडनकुलम में रूस के सहयोग से 4 इकाईयाँ और 1 फास्ट ब्रीडर रिएक्टर शामिल है। इनके प्रचालन होने पर 2031-32 तक कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 22,480 मेगावाट हो जाएगी।

 

Fइसके अतिरिक्त, स्वच्छ ऊर्जा के भाग को बढ़ाने की वैश्विक प्रतिबद्धता के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने और अधिक नाभिकीय विद्युत संयंत्रों के निर्माण हेतु अंतरराष्ट्रीय पार्टनरों के साथ सहयोग हेतु सिद्धांत रूप में अनुमोदन प्रदान कर दिया है।

 

आधुनिक संरक्षोपायों को सबसे अधिक महत्व देते हुए नाभिकीय विद्युत संयंत्र अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रचालित किए जाते हैं। यह अनुपालन भारत के नियामक प्राधिकारी, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) द्वारा सुनिश्चित किया जाता है।

 

यह उपलब्धि नाभिकीय विद्युत संयंत्रों के अभिकल्पन, निर्माण और प्रचालन करने की स्वदेशी क्षमता और हाई एंड प्रौद्योगिकी में विशेषता हासिल करने की क्षमता को प्रदर्शित करती है।