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Webserver Date: 22-July-2017

सुरक्षा

 
 
नाभिकीय संरक्षा और नियमन
 
नियामक एवं संरक्षा तंत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि परमाणु ऊर्जा विभाग की नाभिकीय सुविधाओं के उपस्‍कर सुरक्षित रूप से कार्य करने हेतु अभिकल्पित किये गये हैं और किसी प्रकार की विफलता या दुर्घटना में भी संयंत्र एवं स्‍थल आपाती अनुक्रिया योजना (इमर्जेंसी रिस्पॉंस सिस्टम) जैसी व्‍यवस्‍थाएँ सुचारु रूप से कार्यरत रहें, ताकि जनता को किसी प्रकार की हानि न पहुंचे। इसके अतिरिक्‍त लोक प्राधिकारियों को शामिल करते हुए विस्‍तृत योजनाएँ भी किसी प्रकार की दुर्घटना के सार्वजनिक स्‍थल पर प्रभाव पड़ने की दशा में तुरंत क्रियाशील होने के लिए तैयार रहती हैं। आपाती अनुक्रिया तंत्र ऐसे किसी स्‍थान पर, जहाँ परमाणु ऊर्जा विभाग की कोई सुविधा न हो, वहाँ सार्वजनिक स्‍थल पर किसी विकिरणकीय आपात-स्थिति को संभाल सकती है।
 
भारत में परमाणु ऊर्जा के नियामक और संरक्षा प्रकार्य एक स्‍वतंत्र संस्‍थान - परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद द्वारा पूरे किये जाते हैं।
 
परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद का गठन 15 नवंबर, 1983 को भारत के राष्‍ट्रपति द्वारा परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 (1962 का 33) की धारा 27 द्वारा प्रदत्‍त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिनियम के अंतर्गत कतिपय नियामक और संरक्षा प्रकार्यों को पूरा करने के लिए किया गया था। एईआरबी का नियामक प्राधिकार परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत प्रख्‍यापित नियमों और अधिसूचनाओं से लिया गया है। बोर्ड का ध्‍येय यह सुनिश्चित करना है कि भारत में आयनन विकिरण और नाभिकीय ऊर्जा का प्रयोग स्‍वास्‍थ्‍य एवं पर्यावरण के अनुचित ख़तरे का कारण न बने।
 
नाभिकीय आपाती अनुक्रिया
 
नाभिकीय आपात स्थितियाँ -  त्वरित जबाबी (अनुक्रिया) कार्रवाई कैसे करें :
 
भारत में नाभिकीय सुविधाएँ अपने सुरक्षित प्रचालन तथा जनसामान्‍य और पर्यावरण की संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर स्‍वीकृत दिशा-निर्देशों को अपनाती हैं। एक स्‍वतंत्र नियामक प्राधिकारी उनके संरक्षापूर्ण प्रचालन पर नज़र रखता है। विकिरण निस्‍सरण/उद्भासन की सीमाएँ इतनी न्यून रखी गयी हैं, जो किसी भारी नुकसान कर पाने की मात्रा का अंशमात्र हैं, लेकिन विकिरण के इन अति निम्‍न स्‍तरों से अधिक होते ही आपाती पद्धतियाँ क्रियान्वित हो जाती हैं। इसके परिणामस्‍वरूप नाभिकीय सुविधा के निकट जनसामान्‍य को स्‍वीकृत सीमा से ज्‍यादा विकिरण उद्भासन की संभावना बहुत ही कम है। तथापि, जनसामान्‍य को आश्‍वस्‍त करने के लिए ऐसी असंभाव्‍य परिस्थितियों तक को संभालने के लिए आकस्मिक योजनाओं की समुचित व्‍यवस्‍था की गई है।
 
इन तथ्‍यों को जानने के बाद भी, किसी निकटस्थ नाभिकीय सुविधा के बारे में किसी समाचार या अफवाह के बारे में सुनकर यदि आपको चिंता होने लगती है, तो इन सरल दिशानिर्देर्शों का पालन करें। इन दिशानिर्देशों का पालन आपके क्षेत्र में किसी अन्‍य नाभिकीय आपात-स्थिति जिसमें किसी नाभिकीय सुविधा शामिल न भी हो, की अवस्‍था में भी किया जा सकता है।
 
निम्‍नलिखित का पालन करें :
 
1.    घर के भीतर चले जाएँ और अंदर ही रहें।
2.    रेडियो/टी.वी. ऑन करें और अपने स्‍थानीय प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली सार्वजनिक घोषणाओं पर ध्‍यान दें।
3.    सभी दरवाज़े/खिड़कियाँ बंद कर दें।
4.    समस्‍त भोजन सामग्री, पानी को ढंक कर रखें और ऐसे ढ़के हुए पदार्थों का ही सेवन करें।
5.    यदि आप खुले स्‍थान पर हैं, तो अपना चेहरा और शरीर गीले रुमाल, तौलिया, धोती या साड़ी से ढ़क लें। घर वापस आ जाएँ अपने कपड़े बदल लें/निकाल दें। अच्‍छी तरह से नहा लें एवं स्‍वच्‍छ कपड़े पहन लें।
6.    स्‍थानीय प्राधिकारियों को पूर्ण सहयोग दें और उनके अनुदेशों का पूरी तरह से पालन करें – चाहे वह दवाई लेने के लिए हो, स्‍थान खाली करने के लिए हो या फिर कुछ और।
 
निम्‍नलिखित काम न करें:
 
1.    बिलकुल न डरें।
2.    एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति को फैलाई गई मौखिक अफवाहों पर यकीन न करें।
3.    बाहर न रहें और न ही बाहर जाएँ।
4.    जहाँ तक हो सके, खुले कुओं/तालाबों से पानी न पियें, उद्भासित फसल सब्जियाँ, भोजन, पानी या दूध – इन बाहरी वस्‍तुओं का सेवन न करें।
5.    जिला या नागरिक सुरक्षा प्राधिकारी, जो आपकी आपके परिवार की और आपकी संपत्ति की संरक्षा हेतु यथा संभव कोशिश करते हैं, उनके अनुदेशों की अवज्ञा न करें।
 
परमाणु ऊर्जा विभाग में आपाती अनुक्रिया योजनाओं का अवलोकन :
 
1.    परमाणु ऊर्जा विभाग को देश में सार्वजनिक क्षेत्र में मानव निर्मित विकिरणकीय आपाती स्थितियों के संदर्भ में केंद्रीय एजेंसी माना गया है।
2.    इस प्रयोजन के लिए पऊवि में वर्ष 1987 से एक संकट प्रबंधन समूह (सीएमजी) कार्यरत है। सार्वजनिक क्षेत्र में किसी प्रकार के विकिरण या नाभिकीय आपाती स्थिति के होने की दशा में सीएमजी तुरंत सक्रिय हो जाता है तथा प्रभावित क्षेत्र में स्‍थानीय प्राधिकारी तथा राष्‍ट्रीय समस्‍या प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) के बीच समन्‍वय का कार्य करता है। सीएमजी पऊवि की विभिन्‍न इकाइयों जैसे कि न्‍यूक्लिअर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल), भाभा परमाणु अनुसंधान केन्‍द्र (भापअकें), भारी पानी बोर्ड (भापाबो) और क्रय एवं भंडार निदेशालय (क्रभनि) आदि से लिए गए वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ गठित की जाती है। इससे नियामक प्राधिकारी यानि के परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (एईआरबी) से भी एक वरिष्‍ठ अधिकारी शामिल होते हैं। हर सदस्‍य के लिए एक वैकल्पिक सदस्‍य नियत किये गये हैं ताकि बहुत ही अल्‍प सूचना पर भी सीएमजी क्रियारत हो सके। भापअकें से स्रोत एजेंसियाँ भी सीएमजी को सहयोग देती हैं। वे विकिरण मापन और संरक्षण के क्षेत्र में सलाइ एवं सहयोग तथा विकिरण प्रभावित कार्मिकों को चिकित्‍सा सहायता उपलब्‍ध करवा सकते हैं।
 
3.    जहाँ तक पऊवि की प्रमुख नाभिकीय सुविधाओं जैसे कि नाभिकीय विद्युत केन्‍द्रों का सवाल है, वहाँ विद्युत केन्‍द्र के चारों ओर 1.6 किलोमीटर का अपवर्जित क्षेत्र है जिसमें लोगों के रहने की अनुमति नहीं है। इस समस्‍त क्षेत्र के चारों ओर बाड़ा या दीवार बनी होती है तथा स्‍थल की सीमा परिभाषित करती है। इसके पार सार्वजनिक क्षेत्र होता है तथा संयंत्र स्‍थल के 16 किलोमीटर का परास अपस्‍थलीय आपाती योजना क्षेत्र (ईपीजेड) कहलाता है।
 
4.    किसी भी नाभिकीय सुविधा के प्रचालन के लिए, सामान्‍य व्यवहार के रूप में, विस्‍तृत एवं गहन संरक्षा तंत्रों की व्‍यवस्‍था होती है। इन तंत्रों पर एईआरबी द्वारा नजर रखी जाती है, जिन्‍हें इन लाइसेंसों को प्रदान करने की तथा किसी सुविधा द्वारा उनके दिशानिर्देशों का उल्‍लंघन करने पर उसे बंद करने की भी शक्तियाँ हैं। तथापि, अत्‍यधिक सावधानी के तौर पर, नाभिकीय ऊर्जा केन्‍द्रों के लिये  कुछ “डिज़ाइन आधार से परे” दुर्घटनाओं की अभिधारणा की गई है। ऐसे अति असंभावित परिदृश्‍यों में ही सार्वजनिक क्षेत्र में विकिरण आपात-स्थिति की संभावना है। अत: सुविधा के भीतर स्‍थानीय आपाती स्थितियों से निपटने के लिए अन्‍य प्रकार की आपाती अनुक्रिया योजनाओं की व्‍यवस्‍था के अतिरिक्‍त, सार्वजनिक क्षेत्र में ऐसी आपाती स्थितियों से निपटने के लिए अनुक्रिया योजनाएं तैयार की गई हैं जिन्‍हें स्‍थल बाह्य आपाती स्थितियां कहा गया है। ये योजनाएं जो कि प्रत्‍येक स्‍थल के लिए अलग अलग बनाई गई हैं, और स्‍थानीय जिला प्रशासन के अधीन होती हैं, तथा इन योजनाओं का क्षेत्र संयंत्र के आस-पास या अपस्‍थलीय आपाती योजना क्षेत्र के 16 कि.मी. अर्धव्‍यास क्षेत्र तक होता है।
 
5.    पहली तीन प्रकार की आपाती स्थितियां जिनके घटित होने की संभावना महसूस की गई है और जिनके लिए विस्‍तृत संयंत्र-विशिष्‍ट अनुक्रिया योजनाएं तैयार की गई हैं, वे हैं – इमर्जेन्‍सी स्‍टैन्‍ड बाइ, कार्मिक आपाती स्थिति और संयंत्र आपाती स्थिति। इन सब में, दुर्घटना के परिणामों की, संयंत्र सुविधा तक ही सीमित होने की प्रत्‍याशा होती है। अगली प्रकार की आपाती स्थिति जिसकी घटने की संभावना महसूस की जाती है, वह है - स्‍थल आपाती स्थिति जिसमें दुर्घटना के परिणामों की, स्‍थल की सीमा रेखा के बाहर जाने की प्रत्‍याशा नहीं की जाती है जो है – एक्‍सक्‍लूज़न ज़ोन जिसका मतलब है कि इस अवस्‍था में भी, सार्वजनिक क्षेत्र में कोई विकिरण आपाती स्थिति नहीं है। अंतिम प्रकार की आपाती स्थिति जो कि सार्वजनिक क्षेत्र में विकिरण निस्‍सरणों की अत्‍यंत असंभावित स्थिति की श्रेणी में आती है, वह है - स्‍थल बाह्य आपाती स्थिति और प्रत्‍येक स्‍थल पर इस परिकल्पित परिस्थिति के लिए भी विस्‍तृत अनुक्रिया योजनाएं तैयार की गई हैं। स्‍थानीय जिला प्रबंधन समिति, संकट प्रबंधन समूह, पऊवि और राष्‍ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) इस अंतिम प्रकार की आपाती स्थिति में कार्य करते हैं।
 
6.    यह एनपीसीआईएल के लिए अनिवार्य है कि वह उपर्युक्‍त सभी प्रकार की आपाती स्थितियों से निपटने के लिए व्‍यापक एवं चुस्‍त योजनाएं तैयार करे। अं‍तिम प्रकार की आपाती स्थिति को छोड़, शेष सभी एनपीसीआईएल की जिम्‍मेदारी के दायरे में आते हैं और बतौर नियमनकर्ता, एईआरबी इन योजनाओं को अनुमोदित करता है। एनपीसीआईएल के लिए यह भी अनिवार्य है कि वह अभ्‍यास एवं ड्रिल के माध्‍यम से आवधिक रूप से इन योजनाओं का परीक्षण करें और संरक्षा समितियों और एईआरबी द्वारा यथा-विनिर्दिष्ट सुधारात्मक उपाय करें। ट्रिगर मैकेनिज़म के प्रथम चरण के तौर पर संयंत्र या स्‍थल आपात-स्थिति/ अभ्‍यास के दौरान भी संकट प्रबंधन समूह, पऊवि और उसके स्रोत एजेंसियां को स्‍वत: ही सावधान कर दिया जाता है।
 
7.    सांविधिक आवश्‍यकताओं के अनुसार स्‍थल बाह्य आपाती योजनाओं की तैयारी एवं परीक्षण स्‍थानीय जिला प्रशासन की जिम्‍मेदारी है। एनपीसीआईएल ने सभी संबंधित जिला प्रशासनों के साथ समन्‍वय स्‍थापित किया है ताकि वे हर परमाणु ऊर्जा केन्‍द्र के लिए व्‍यापक स्‍थल बाह्य आपाती योजनाएं तैयार कर सके। उल्‍लेख किया जाता है कि एईआरबी किसी भी नाभिकीय ऊर्जा केन्‍द्र के कमीशनन की अनुमति तब तक नहीं देता जब तक कि सभी प्रकार की आपाती स्थितियों के लिए ऐसी योजनाएं कमीशनन की तारीख से पूर्व तैयार कर ली नहीं जाती हैं।
 
8.    स्‍थल बाह्य आपाती योजनाओं का आवधिक रूप से परीक्षण किया जाता है और सभी नाभिकीय ऊर्जा केन्‍द्रों ने सुनिश्चित किया है कि यह कार्रवाई दो वर्ष में कम से कम एक बार की जाए। इन कार्रवाईयों के दौरान संकट प्रबंधन समूह के सभी सदस्‍य, पऊवि, संसाधन एजेंसियां और दिल्‍ली एवं मुंबई के प्रमुख पदाधिकारियों को सचेत किया जाता है। इन अभ्‍यासों में जिला प्रशासन पूरी तरह से शामिल होता है तथा स्‍वतंत्र पर्यवेक्षकों (एईआरबी, एनपीसीआईएल, सीएमजी) की रिपोर्टों को प्रतिपुष्टि के रूप में उपयोग इस उद्देश्‍य किया जाता है कि आपाती अनुक्रिया तंत्र को और भी सुधारा जा सके।
 
9.    किसी भी आपाती परिस्थिति को संभालने में संचार के महत्‍व को पहचानते हुए मुंबई में दो अलग अलग स्‍थानों पर आपाती नियंत्रण कक्ष (ईसीआर) चलाये जाते हैं। ये नियंत्रण कक्ष वर्ष भर सभी दिन 24 घंटे प्रचालित रहते हैं तथा पऊवि महत्‍वपूर्ण इकाइयों से सतत रूप से संपर्क बनाये रखते हैं। ये नियंत्रण कक्ष वायरलेस, टेलीफोन, फैसिमाइल, वीएसएटी और इलेक्‍ट्रानिक मेल सुविधाओं से लैस हैं। दैनिक आधार पर इनका परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि ये सतत रूप से उपलब्‍ध रहें। इसके अलावा, समस्‍त संपर्क श्रृंखला की सभी कडि़यों का परीक्षण करने के लिए हर प्रमुख स्‍थल पाक्षिक या मासिक संपर्क अभ्‍यास कार्यक्रम आयोजित करता है।
 
10.   लगभग 165 संपर्क अभ्‍यासों के अतिरिक्‍त प्रतिवर्ष लगभग 110 आपाती अभ्‍यास कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। वर्ष 1987 से 2000 तक की अवधि के दौरान देश के विभिन्‍न स्‍थलों पर संबंधित जिला प्रशासनों द्वारा 34 स्‍थल बाह्य आपाती अभ्‍यास कार्यक्रम आयोजित किये गये। इसमें स्‍थानीय जिला प्रशासन जैसे पुलिस, स्‍वास्‍थ्‍य, परिवहन आदि के पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें से प्रत्‍येक अभ्‍यास कार्यक्रम की समाप्ति पर, जिलाधीश/मजिस्‍ट्रेट एक “क्रिटीक या फीडबैक” सत्र की अध्‍यक्षता करते हैं जिसमें कमियों को नोट किया जाता है ताकि सुधारात्मक उपाय किये जा सकें।
 
11.  यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी दुर्घटना घटने की असंभावित परिस्थिति में सार्वजनिक क्षेत्र में रेडियोसक्रियता का निस्‍सरण न हो, नाभिकीय सामग्री के परिवहन के संबंध में, पैकेजि़ंग एवं परिवहन के लिये अनिवार्य डिज़ाइन विनिर्देश, प्रहस्‍तन एवं परिवहन के लिए तंत्र एवं पद्धतियां पर्याप्‍त रूप से विद्यमान हैं।  तथापि, यदि ऐसी घटना घटती है तब भी कुछ ऐसी पद्धतियां हैं कि पऊवि सचिवालय में स्थि‍त आपाती नियंत्रण कक्ष को एलर्ट मिल जाता है जो तुरंत ही संकट प्रबंधन समूह, पऊवि को सक्रिय/सचेत कर देता है।
 
12.  नाभिकीय सामग्री के अनधिकृत या आशंकित रूप से विद्यमान होने की स्थिति के परिणामस्‍वरूप सार्वजनिक क्षेत्र में किसी अन्‍य प्रकार के नाभिकीय आपाती स्थिति उत्‍पन्‍न होने की दशा में क्‍या किया जाना चाहिए, इस संबंध में अनुसरण किये जाने वाले आवश्‍यक दिशानिर्देशों की पुस्तिका राज्‍य सरकारों एवं संघ शासित प्रदेशों में परिचालित की गई हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार निकटतम पऊवि सुविधा और पऊवि आपाती नियंत्रण कक्ष से तुरंत संपर्क किया जाना जरूरी है जो उस आपाती स्थिति से निपटने के लिए, आगे की जाने वाली आवश्‍यक कार्रवाई के बारे में सलाह देंगे।
 
इस लघुलेख का मुख्‍य उद्देश्‍य जन सामान्‍य को शिक्षित करना और विकिरण आपाती स्थितियों से निपटने के लिए पऊवि की आपाती अनुक्रिया तंत्र के बारे में विश्‍वास जगाना है। जहां तक पऊवि की नाभिकीय सुविधाओं का सवाल है, नियामक एवं संरक्षा तंत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि उपकरणों को सुरक्षित प्रचालन की दृष्टि से डिज़ाइन किया गया है और किसी विफलता या दुर्घटना की असंभावित स्थिति में भी, संयंत्र एवं स्‍थल आपाती अनुक्रिया योजना जैसे मैकेनिज्‍म की समुचित व्‍यवस्‍था है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुर्घटना का जनसामान्‍य पर कोई प्रभाव न पड़े। इसके अतिरिक्‍त, स्‍थानीय सार्वजनिक प्राधिकारियों को शामिल करते हुए विस्‍तृत योजनाओं की भी व्‍यवस्‍था होती है जो विकिरण के परिणामों द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र को प्रभावित करने की स्थिति में, तुरंत जबाबी (अनुक्रिया) कार्रवाई के तौर पर अपनायी जाती हैं। यह प्रणाली (सिस्टम) इस स्थिति में है कि, सार्वजनिक क्षेत्र में किसी अन्‍य विकिरण आपाती स्थिति के किसी ऐसे स्‍थान पर घटने पर, जहां पऊवि की सुविधा विद्यमान न हो,  वहां पर भी कार्रवाई कर सके ।