All DAE

DAE

Webserver Date: 26-September-2017

अस्वीकरण

 
 

अस्वीकरण (डिस्क्लेमर)

 इस वेबसाइट को एनआईसी, भारत सरकार द्वारा डिजाइन विकसित एवं प्रस्तुत किया गया है । 

 

 यद्यपि इस वेबसाइट की सामग्री की सटीकता एवं समयानुकूलता को सुनिश्चित करने के सभी प्रयास किये गये हैं, इसे कानूनी वक्तव्य के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए और न हीं किन्हीं कानूनी उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त किया जाना चाहिए । एनआईसी इस सामग्री की सटीकता, संपूर्णता, उपयोगिता अथवा अन्यथा के बारे में कोई जिम्मेदारी नहीं स्वीकार करता है । उपयोगकर्ताओं को यह सलाह दी जाती है कि वे वेबसाइट पर प्रदत्त जानकारी पर कोई काम करने से पूर्व संबंधित सरकारी विभाग(गों) और या अन्य स्रोतों से इस सूचना को सत्यापित कर लें/जांच लें, तथा व्यावसायिक सलाह ले लें ।

 

 इस वेबसाइट के उपयोग के संबंध में या उपयोग से होने वाले किसी भी व्यय, सीमा सहित हानि या क्षति, अपरोक्ष या परिणामी हानि या क्षति, या किसी भी व्यय हानि या क्षति, या डाटा के उपयोग की हानि हेतु किसी भी घटना में सरकार या एनआईसी जिम्मेदार नहीं होगी ।

 

 इस वेबसाइट पर जो अन्य वेबसाइटों के लिंक शामिल किये गये हैं, वे केवल जनता की सुविधार्थ हैं । एनआईसी, लिंक की गयी वेबसाइटों की सामग्री या विश्वसनीयता के लिए जिम्मेदार नहीं है, और उनमें अभिव्यक्त किये गये विचारों का समर्थन नहीं करता है । हम ऐसे लिंक-पेजों की सदैव उपलब्धता की गारंटी भी नहीं दे सकते हैं ।

 

इस वेबसाइट पर प्रस्तुत सामग्री को आप नि:शुल्क पुन: प्रस्तुत कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले आपको एक मेल भेजकर सम्यक अनुमति लेनी होगी । तथापि सामग्री को सही ढंग से प्रस्तुत करना होगा, और इसे न तो निन्दात्मक तरीके से और न ही भ्रमात्मक तरीके से प्रयुक्त किया जा सकता है । जहां भी सामग्री प्रकाशित की जा रही हो, या अन्यों को दी जा रही हो, उसका आभार अवश्य प्रदर्शित किया जाना चाहिए । तथा‍पि सामग्री की पुन: प्रस्तुति की अनुमति, ऐसी किसी सामग्री पर लागू नहीं होगी जो किसी तीसरे पक्ष के कॉपीराइट के रूप में स्थापित हो। ऐसी सामग्री की पुन: प्रस्तुति का प्राधिकार संबंधित विभागों/कॉपीराइट धारकों से ही अनिवार्यत: लिया जाना चाहिए ।

 

इन शर्तों व निबंधनों को भारतीय कानूनों द्वारा शासित किया जाएगा व उनके अनुरूप वाचन किया जाएगा । इन शर्तों व निबंधनों के अंतर्गत उठने वाला कोई भी विवाद पूर्णत: भारतीय न्यायालयों के क्षेत्राधिकार का विषय होगा ।